बाउंस रेट क्या है? हर प्रकार की बेसिक से एडवांस

बाउंस रेट क्या है? हर प्रकार की बेसिक से एडवांस

चलिए आज जान ही लेते है की विकिकोश से कम कैसे करें बाउंस रेट क्या है यह एक इंटरनेट मार्केटिंग शब्द है जिसका उपयोग वेब अवलोकन में किया जाता है. जो Visitors के % का प्रतिनिधित्व करता है, जो साइट के पेज में प्रवेश करते है फिर उसी के अन्य पेजों को देखने के बजाय छोड़ देते है. बाउंस रेट को जल्द से जल्द कम कैसे करें और अन्य बाउंस रेट चेकर ऑनलाइन टूल के बारे में पूरी जानकारी.

वेबसाइट के पेज पर रुकने के समय को ही बाउंस रेट कहा जाता है इस पेज पर Bounce Rate से संबंधित हर प्रकार की बेसिक से एडवांस इनफार्मेशन शेयर करने की पूरी कोशिश की गई है उम्मीद करते है आपको यह लेख पसंद आए.

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बाउंस रेट के बारे में:-

बाउंस रेट की गणना एक पेज विज़िट की संख्या की गणना करके और कुल विजिटर्स से विभाजित करके की जाती है. फिर इसे कुल विज़िटर के प्रतिशत के रूप में दर्शाया जाता है.

बाउंस रेट का उद्देश्य:-

बाउंस रेट की गणना एक पेज विज़िट की संख्या की गणना करके और कुल विजिटरों की रूचि पैदा करने के लिए किसी पेज की प्रभावशीलता या प्रदर्शन को निर्धारित करने में मदद के लिए बाउंस रेट का यूज़ किया जाता है. कम बाउंस रेट वाले एक पेज में विजिट अर्थात पेज प्रभावी रूप से Visitors को अधिक पेज देखने और वेब साइट में गहराई से जारी रखने का कारण बनता है.

हाई बाउंस रेट आमतौर पर संकेत देती है कि वेबसाइट विजिटरों की निरंतर रूचि को आकर्षित करने का अच्छा काम नहीं कर रही है. इसका मतलब है कि विज़िटर केवल एक पेज को दूसरों को देखे बिना या निर्दिष्ट समय से पहले साइट के भीतर किसी भी प्रकार का एक्शन किए बिना ही दिखते है.

बाउंस रेट का निर्माण:-

बाउंस रेट का निर्माण जब कोई विज़िटर किसी वेबपेज पर केवल एक पेज अवलोकन करता है, मतलब विज़िटर किसी उल्लेखित अवधि होने से पहले किसी अन्य पेज पर ज्ञ बिना साइट छोड़ देता है. कोई उधोग मानक न्यूनतम या अधिकतम समय नहीं है जिसके द्वारा एक व्यूअर को बाउंस होने के लिए छोड़ना होगा. इसके बजाय, यह एनालिटिक्स ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर के सत्र टाइमआउट द्वारा निर्धारित किया जाता है.

बाउंस रेट की विकिकोश प्रतिशत में मात्रा: नीचे लिस्ट में आपको बाउंस रेट की मात्रा बतलाई गई है जिसे जानना आपके लिए बेहत जरूरी है:-

  • अगर किसी ब्लॉग का बाउंस रेट 1% से 10% के बीच है तो वह दुनिया की सफल वेबसाइटों की लिस्ट में आता है.
  • अगर यह 10% से 40% तक आता है तो यह भी अच्छा है.
  • अगर बाउंस रेट 40% से अधिक है तो आपको इसे कम करने में लग जाना चाहिए.
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विज़िटर को पेज पर प्रवेश कराने में जितनी मेहनत लगती है और वो साइट पर रुके ही नहीं तो हमारी मेहनत बेकार है मानो, इसीलिए जितना समय आप विजिटर लाने में करते है उतनी ही विज़िटर को साइट के पेज पर रुके रहने में करें.

बाउंस रेट से लाभ: bounce rate se kya labh hota hai उत्तर, नहीं Google इम्पोर्टेन्ट फैक्टर में से एक है. Bounce Rate जिसे हिंदी में बाउंस दर भी कहा जाता है साइट में बाउंस रेट के कोई लाभ नहीं इससे आपके वेब का नुकसान है. क्योंकि बाउंस रेट किसे कहा जाता है इसे हमने पहले विकिकोश पर बता दिया था कि बाउंस रेट किसी भी पेज पर अन्य पेजों को पढ़े बिना ही क्लोज करना होता है तो इसीलिए बाउंस रेट के कोई फायदे नहीं.

तमाम सवालों के जवाब यहां जानें:-

बाउंस रेट अपडेट से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले सवाल के जवाब आप नीचे अवलोकन कर सकते हैं:-

प्रश्न 1 : बाउंस रेट वेबसाइट पर कितना होना चाहिए?

उत्तर: बाउंस रेट वेबसाइट पर कम से कम 10% में अधिकतम 40% तक विकिकोश अनुसार होना चाहिए.

प्रश्न 2 : बाउंस रेट चेक ऑनलाइन कहाँ से करें?

उत्तर: बाउंस रेट ऑनलाइन चेक गूगल एनालिटिक से करें. यह गूगल का एक ऐसा Product है जिसका उपयोग करके हम आसन से यूजर्स के बारे में पता लगा सकते हैं, किस देश से कितने विज़िटर्स आ रहे हैं, कितने पेज-व्यू हो रहे हैं या कितना बाउंस रेट हो रहा है. इसके साथ कितना समय तक विज़िटर किस पेज पर रुक रहे हैं जैसी बहुत सी जानकारी, मुझे लगता है कि हर ब्लॉगर को गूगल के प्रोडक्ट का इस्तमाल जरूर करना चाहिए.

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प्रश्न 3 : बाउंस रेट से वेबसाइट पर क्या असर पड़ता है?

उत्तर: बाउंस रेट ज्यादा होने का सीधा-सा मतलब है कि लोग आपकी Website या Blog पर ज्यादा देर टिक नहीं रहे हैं. वे जल्दी से आपके ब्लॉग को छोड़कर जा रहे हैं; ज्यादा Pages को नहीं Check कर रहे हैं या पढ़ रहे हैं, इससे Google और दुसरे खोज इंजन को लगता है कि आपकी Site लोगों के लिए अच्छी नहीं है तभी तो ज्यादातर लोग आपकी वेब पेजों को पढ़ने के बजाय छोड़कर जा रहे हैं. इसलिए अपनी वेबसाइट या ब्लॉग का बाउंस रेट जितना हो सके उतना कम रखने का प्रयास करें.

बाउंस रेट कम कैसे करें जानकारी नीचे सीखें:-

1. बढ़िया वेब डिज़ाइन: आपके रीडर्स डिज़ाइनर नहीं है फिर भी उनको अच्छे और बुरे वेब डिज़ाइन का पूरा सेंस है. आगर आपका वेब डिज़ाइन व्यवस्थित नहीं है, आँखों में चुभने वाले कलर्स का इस्तेमल किया गया है या फिर पूरी साइट पर एनिमेशन रन कर रहा हो तो इसे चेंज कर ले.

अगर आपको वेब डिजाइनिंग के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है तो सिंपल डिजाइन भी अच्छा रहेगा (Defalt)

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2. बेहतरीन कंटेंट:- ऐसी सामग्री डालें जिसमें अच्छी जानकारी हो और जो विज़िटर को बांधे रख सके, केवल वही दर्ज करें जो विज़िटर चाहता है.

3. इंटरलिंकिंग: अपने लेख में पिछली पोस्ट के लिंक भी डाले जिससे की आप के विज़िटर और भी पोस्ट को नोटिस कर सकें. उदाहरण के लिए आप इसी पोस्ट को ले देख लीजिए जिसमे मैने जहां भी संभव हो सकता था लिंक Add की है दुसरी पोस्ट की.

4. मल्टीमीडिया का उपयोग: अपनी साइट को रोचक बनाने के लिए इमेज, जिफ़, ऑडियो और वीडियो का उपयोग करें और इन दिनों इन्फोग्राफिक्स का चलन है, आप उनका उपयोग भी कर सकते हैं.

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5. लोडिंग टाइम कम करें: लोडिंग टाइम बहुत ही जरुरी है बाउंस रेट कम करने के लिए, क्योंकि कोई भी इंतजार करना पसंद नहीं करता, अगर साइट जल्दी लोड नहीं होगी तो विज़िटर टैब को क्लोज़ कर सकते है.

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